𑒧𑒱𑒟𑒱𑒪𑒰𑒏𑓂𑒭𑒩 𑒧𑒹 𑒫𑒹𑒥𑒮𑒰𑒃𑒙 𑒣𑒩 𑒙𑒰𑒃𑒣𑒱𑒓𑓂𑒑
(किन्तु इसके लिए उस वेबसाइट पर HTML कोड की अनुमति रहनी चाहिए | जिस किसी वेबसाइट पर HTML कोड की अनुमति रहती है उसपर आप मनचाहा कार्य कर सकते हैं | इस अनुच्छेद का सम्पूर्ण टेक्स्ट HTML द्वारा बनाया गया है, मिथिलाक्षर भी और देवनागरी आदि भी :--)
(आँजि) 𑒀
(अंकुश : गणेश जी के चिह्न से मिथिला में शुभ लेखन आरम्भ करने की परम्परा रही है |)
(स्वर) 𑒁 𑒂 𑒃 𑒄 𑒅 𑒆 𑒇 𑒈 𑒉 𑒊 𑒋 𑒌 𑒍 𑒎
(कवर्ग) 𑒏 𑒐 𑒑 𑒒 𑒓
(चवर्ग) 𑒔 𑒕 𑒖 𑒗 𑒘
(टवर्ग)𑒙 𑒚 𑒛 𑒜 𑒝
(तवर्ग)𑒞 𑒟 𑒠 𑒡 𑒢
(पवर्ग)𑒣 𑒤 𑒥 𑒦 𑒧
(यवर्ग)𑒨 𑒩 𑒪 𑒫 𑒬 𑒭 𑒮 𑒯
(मात्रा) 𑒰 𑒱 𑒲 𑒳 𑒴 𑒵 𑒶 𑒷 𑒸
𑒹 𑒺 𑒻 𑒼 𑒽 𑒾
𑒿 𑓀 𑓁 𑓂 𑓃 (अवग्रह :-) 𑓄 (ग्वम् :-) 𑓅 (संक्षेप :-)𑓆 𑓇
(अङ्क) 𑓐 𑓑 𑓒 𑓓 𑓔 𑓕 𑓖 𑓗 𑓘 𑓙
छोटा ए 𑒺 तथा छोटा आ 𑒽 के लिए भी यूनिकोड कंसोर्टियम ने चिह्न स्वीकृत किये हैं क्योंकि मैथिली भाषा में उन स्वरों का अस्तित्व है, किन्तु लेखन में इन चिह्नों का प्रचलन नहीं रहा है जिस कारण फॉण्ट में इन चिह्नों को मैंने समाविष्ट तो किया है किन्तु लेखपट्टिका में उनको कीबोर्ड से सम्बन्धित नहीं किया | छोटा-ए का उदाहरण है "कएल", "हएत" आदि, और छोटा-आ तो असल में छोटा-ओ है जिसे भूलवश छोटा-आ कहा गया, इसका उदाहरण है "घ'र" | मैथिली में दीर्घ-अ (प्लुत) का भी बहुत प्रयोग होता है | इन स्वरों के लिए यूनिकोड के चिह्नों को स्वीकारने अथवा नए चिह्न बनाने से पहले सामजिक स्वीकृति आवश्यक है, तभी फॉण्ट में इन चिह्नों के लिए बटन सार्वजनिक किये जायेंगे |
𑒧𑒱𑒟𑒱𑒪𑒰𑒏𑓂𑒭𑒩 𑒧𑒹 𑒫𑒹𑒥𑒮𑒰𑒃𑒙 𑒣𑒩 𑒙𑒰𑒃𑒣𑒱𑒓𑓂𑒑
दो तीन सौ वर्ष पहले कुछ लोग मिथिलाक्षर में 'श' इस तरह भी लिखते थे, जो दन्त 'स' का प्रभाव था :--
:-- É